धर्म का धर्मसंकट

(मेरा अपना विचार,इंसानियत के भावना से पढ़े)

        अजीब सी स्थिति बन पड़ी है इन धर्मो के चक्कर में।धर्म के चोचले और आये दिन होते घटनाओ के बारे में बताने की ज्यादा आश्यकता नही। अपने धर्म को बचाने में सब लगे पड़े है,कोई कुछ उपाय कर रहा कोई कुछ।धर्म के संरक्षण के नाम पर कोई जिहाद कर रहा,कोई घर वापसी करा रहा तो कोई अन्धाधुन्ध विरोध।अच्छा भी है अपने धर्म प्रचार-प्रसार करना भी चाहिए,संरक्षण भी करना चाहिये लेकिन जो तरीका उसके लिए अपनाया जाता है क्या वो सही है अगर है भी तो कितना?

मैं मान लेता हूँ की सब जायज है लेकिन एक सवाल ये भी है की क्या कोई धर्म इतना बुरा हो गया की आज उसका ही सरक्षण की आवश्यकता पड़ रही?
सवाल हजारो हैं,धर्म कोई ऐसी वैसी चीज नही की हर साल हर दशक में इसको बचाने या बढाने की जरूरत पड़े।
धर्म की बात हो और एक विषेश समुदाय(उदाहरण स्वरूप) की बात न हो तो लेख अधूरा रह जाएगा।हाँ सबके जेहन में एक तरफ सीरिया,पाकिस्तान,अफगानिस्तान,बांग्लादेश और बाकी मुस्लिम देश और दूसरी तरफ दुबई वगैरह जरूर आता है।एक ऐसा धर्म जहाँ अपने ही धर्म को मारा जा रहा है बर्बाद किया जा रहा है और दूसरी तरफ एक पॉजिटिव ये है की सबसे अच्छा विकसित देश भी उसी धर्म के अनुयायियों का है।तब ये बात एकदम सोचनीय हो जाती है की आखिर असली तरीका क्या है शांति से रहने की? या अपने धर्म को बढाना ही असली शांति है?

बाकी देश दुनिया को देख के हमे सबक लेनी चाहिए की धर्म ही सबकुछ नही होता वरना सबसे ज्यादा आतंकवादी एक धर्म से पैदा होते है जिनका उद्देश्य बेढंगा है बिना किसी तुक के।ईश्वर,अल्लाह ने हम सभी को इंसान नामक धर्म में जन्म दिया एक अल्प आयु मिली है हमे उपहार स्वरूप,हमे इंसानियत के धर्म में ही रहना चाहिए।धर्म तो सिर्फ एक रास्ता है जीने का,सभी धर्म में कुछ ऐसे अद्वितीय बेतुके लोग है जो धर्म को तोड़ के रख दिए हैं और उसमे आम जनता पिसती जा रही है।
जरा आप सोच के देखिये की अगर आप के बगल में कोई दूसरे धर्म का है जिनके साथ आप बचपन से खेले-कूदे हैं,एक थाली में खाये है,साथ साथ त्योहार मनाये है तो क्या अब आप उसे मार डालेंगे?
उसके माँ,बेटी,बहु के साथ बदतमीजी करेंगे।क्या आपका धर्म इतना गिरा हुआ है,यही सिखाता है?अगर हाँ तो आप गलत हैं एकबार आप इंसानियत वाला धर्म अपनाकर देखे कोई गिलवा शिकवा नही होगी।लेकिन एक सवाल और है की इंसानियत वाला धर्म अकेले के अपनाने से होगा क्या??

(फिर अगले कड़ी में इस बारे में बात करेंगे कुछ नए विचार व सवालो,उपायो के साथ।।)

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