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लालच बुरी बला है

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आज के असेंबली में बच्चो को "लालच बुरी बला है" नामक एक कहानी से लालच ना करने के लिए प्रेरित किया गया। राजा मिडास एक धनी लेकिन लालची शासक था जो और अधिक सोना चाहता था। एक दिन भगवान उसके सामने प्रकट हुए और उसको वरदान दिए —वह जिस चीज़ को भी छूएगा, वह सोने में बदल जाएगी। उत्साहित होकर, उसने अपने महल, फ़र्नीचर और यहाँ तक कि फूलों को भी सोने में बदल दिया। हालाँकि, जब उसने खाने की कोशिश की, तो उसका खाना सोने में बदल गया, जिससे उसे खाना नामुमकिन हो गया। इससे भी बुरी बात यह हुई कि जब उसकी प्यारी बेटी दौड़कर उसके पास आई, तो वह भी सोने की मूर्ति में बदल गई। दुखी होकर, मिडास को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने विनती की कि उसका वरदान वापस ले लिया जाए। उसकी इच्छा पूरी हुई, और उसे पता चला कि प्यार और खुशी सोने से कहीं ज़्यादा कीमती हैं। नैतिक शिक्षा: लालच दुःख का कारण बन सकता है। सच्चा धन प्रेम और साधारण खुशियों में निहित है।

हमें कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए।

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आज के असेंबली में बच्चो को कभी झूठ नहीं बोलने के लिए एक कहानी के माध्यम से प्रेरित किया गया। कहानी है 5 क्लास में पढने वाली मीणा और दीपा की.. दोनो बहुत होशियार चाहे पढाई की बात हो या स्कूल में किसी भी prog में हिस्सा लेने की… दोनो एक से बढ कर एक थीं.. हर चीज में अव्वल… पर अब टीचर को दोनो मे से चुनना था एक best all rounder बहुत मुश्किल था कि किसे चुने तो… टीचर को आईडिया आया और उन्होनें दोनो मे एक compitition करवाने की सोची और बोला कि इसमें जो जीत जाएगा वो बनेगा best all rounder… फिर दोनों को बुलाया गया और बीज दिए और बोले कि इनको घर ले जा कर गमले में लगाओ और दो महीने बाद जिसका पहली तारीख को जिसका पौधा अच्छा होगा उसे ही best all rounder डिक्लेयर बनाया जाएगा.. पर एक दूसरे को इसके बारे में बताना नही है यानि बात नही करनी के पौधा कितना बडा हुआ… जिसने भी बात की उसे इस कॉम्पीटिशन से बाहर कर दिया जाएगा.. दोनो खुश क्योकि बहुत आसान था.. पौधा ही तो लगाना था. दोनो घर गए गमले में बीज डाले और नियमित उसमे पानी देने लगीं कुछ समय बीता … गमले में पौधा बाहर नही आया… कुछ नही हुआ… दोनों बात भी न...

फसलों का संघर्ष

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प्यारे बच्चों आज 30 अगस्त 2025 के असेंबली में हम एक किसान की कहानी के माध्यम से समझेंगे कि कैसे जीवन में हमें सफल होने के लिए निरन्तर संघर्ष करते रहना चाहिए।  एक प्रचलित कथा के अनुसार पुराने समय में एक किसान की फसल बार-बार खराब हो रही थी। कभी तेज बारिश की वजह से, कभी तेज धूप की वजह से, कभी ठंड की वजह से उसकी फसल पनप नहीं पा रही थी।  एक दिन इससे दुखी होकर किसान भगवान पर नाराज हो गया। वह भगवान को लगातार कोस रहा था। तभी वहां भगवान प्रकट हुए। किसान ने भगवान से कहा कि भगवन् आपको खेती की बिल्कुल भी जानकारी नहीं है, आपकी गलत समय पर बारिश कर देते हो, कभी भी तेज धूप और ठंड बढ़ा देते हो। इससे हर बार मेरी फसल खराब हो जाती है। आप मेरी अगली फसल तक मेरे अनुसार मौसम कर दीजिए। जैसा मैं चाहूं, वैसा ही मौसम रहे। ये बातें सुनकर भगवान ने कहा कि ठीक अब से ऐसा ही होगा। ये बोलकर वे अंर्तध्यान हो गए। अगले दिन से किसान ने फिर से गेहूं की खेती शुरू कर दी। अब जब वह बारिश चाहता था, तब बारिश होती, फसल के लिए जब उसे धूप की जरूरत होती, तब धूप निकलती। इस तरह उसकी इच्छा के अनुसार मौसम चल रहा था। ध...

क्षमा और भरोसा प्राप्त करना एक महान गुण है।

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आज के मॉर्निंग असेंबली में बच्चों को प्रधानाचार्य के द्वारा दो कहानियां सुनाई गई जिसके अंतर्गत उनके बार-बार शिकायत करने की आदत में सुधार होगा।सभी बच्चे अपने मित्रो के साथ ही खेलते हैं लेकिन थोड़ी-थोड़ी बातों को लेकर एक दूसरे की शिकायत भी करते हैं।बार- बार झूठी शिकायतों से शिक्षक के नजर में उनका भरोसा कम हो जाता है।और जब सच में कोई घटना होती है तो तब शिक्षक बच्चो पर भरोसा नहीं कर पाते हैं। एक गांव में एक चरवाहा रहता था।वह रोज गांव के सभी पशुओं को खेत में चराने लेकर जाता था।एक दिन उसके दिमाग में मस्ती सूझी कि क्यों ना गांव के अन्य किसानों के साथ थोड़ी मस्ती की जाय।गांव वालों के साथ मजाक करने के लिए वह खेत में तेज-तेज चिल्लाने लगा की बचाओ-बचाओ भेड़िया आ गया ,भेड़िया हमारे जानवरों को खा जाएगा।इतना सुनकर गांव वालों जहां थे वहीं से जल्दी भागकर आए।आने के बाद देखे की वह चरवाहा खूब तेज हंस रहा है और वहा कोई भेड़िया नहीं है।गांव वाले उस चरवाहे को खूब खरी-खोटी सुनाएं और वापस आ गए। दिन बीतने लगा।फिर उस चरवाहे के दिमाग मस्ती करने की सूझी कि एकबार फिर क्यों ना वैसा ही मजाक किया जाए।फिर उ...

खूबियां सबमें हैं

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बच्चो,ईश्वर ने आप सभी को किसी विशेष खूबी से नवाजा है।किसी को लिखना बहुत अच्छा आता है तो किसी को बहुत अच्छा बोलना तो किसी को बहुत सुंदर पेंटिंग बनाना तो किसी को गीत गाना इत्यादि इत्यादि।बस आप सभी को अपने खूबी को पहचानकर और उसे तराशकर अपने जीवन में एक सफल इंसान बनना है। बच्चो,आओ "खूबी सबमें है " कहानी के माध्यम से समझेंगे कि कैसे सबका जीवन खास होता है और सबकी अहमियत बराबर होती है। एकबार की बात है,जंगल का राजा शेर युद्ध की तैयारी कर रहा था। उसने जंगल के सभी जानवरों की एक सभा बुलाई। हाथी, हिरन, ख़रगोश, घोड़ा, गधा, भालू, बंदर सभी आए। राजा शेर ने सबको उनके काम सौंपे दिए। केवल ख़रगोश और गधे को काम देना बाक़ी था। शेष जानवर बोले, 'महाराज, आप अपनी सेना में गधा और ख़रगोश को शामिल मत कीजिए।' 'लेकिन क्यों?' शेर ने पूछा। तब सभी जानवरों की ओर हाथी खड़ा हुआ और बोला, 'महाराज, गधा इतना मूर्ख है कि वह हमारे किसी काम का नहीं है, युद्ध के समय बुद्धीमान व्यक्ति की ज़रूरत होती है।' फिर भालू बोला, 'और महाराज, ये ख़रगोश तो इतना डरपोक है कि मेरी परछाई से ही डरकर भा...

सफलता का महत्व

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बच्चो आज हम सभी 22 अगस्त 2025 को विद्यालय के असेंबली में उपस्थित हुए हैं। आज एक कहानी के माध्यम से "सफलता के महत्व" को समझेंगे कि आपके जीवन में आपका सफल होना कितना महत्व रखता है। प्यारे बच्चों,एक नगर में एक धोबी रहता था।उस धोबी के पास एक गधा था जो धोबी के कपड़े को ढोता था।एकबार ,रामनवमी का पूजा चल रहा था।तो मंदिर के पुजारी जी ने उस धोबी से उसका गधा लिया और गधे के पीठ पर बढ़िया सा आसन बना कर उसपे श्री राम की मूर्ति को रख नगर में घुमाने लगे।नगर के हर एक दरवाजे पर गधे को लेकर जाते। लोग गधे के पीठ पर रखे मूर्ति को देखकर पूजा करते,अगरबती दिखाते,प्रसाद चढ़ाते और हाथ जोड़कर प्रणाम करते। शाम के समय जब गधा अपने घर गया तो एकांत में उसने सोचा कि वह जहां जा रहा है उसकी पूजा हो रही है।लोग उसके आगे हाथ जोड़ रहे हैं वह कितना महान हो गया।मन ही मन गधे को स्वयं पर गर्व होने लगा,वह सर्वशक्तिमान है।लोग उसकी पूजा करते हैं। तभी उसे उसकी पीठ पर रखे मूर्ति के भार का एहसास हुआ कि अब तो मेरा इतना पूजा हो रहा है अब इस मूर्ति को अपने पीठ से उतार लेना चाहिए।झूठ का ही इस मूर्ति से मेरे पीठ म...

बच्चों की पॉकेट मनी

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बच्चों के लिए पॉकेट मनी बड़ा ही पसन्द होता है उन्हें स्कूल जाने का भले ही मन ना करें लेकिन पॉकेट मनी लेना उन्हें बहुत ही पसंद होता है,जिसे वे अपने पसंद की चीजें खरीदते हैं। बच्चों को पॉकेट मनी देना एक तरह से खराब भी है तो एक तरह से अच्छा भी होता है।अक्सर सभी माता-पिता के मन मे ये सवाल जरूर ही आता है कि बच्चों को पैसा देना ठीक है या नहीं?या किस उम्र से बच्चों को पॉकेट मनी देना शुरू किया जाए?या कितनी पॉकेट मनी दिया जाए? आजकल स्कूल जाते समय माता-पिता दुलार से बच्चों को पैसा थमा देते हैं या कभी-कभी किसी मजबूरी बस उन्हें टिफिन के जगह पॉकेट मनी देते हैं या कभी-कभी बच्चे के जिद्द के चलते या स्कूल भेजने के लिए पॉकेट मनी का लालच गार्डियन देते हैं। (1) पॉकेट मनी देना उचित है या नही? अगर उम्र के लिहाजे से देखा जाए तो बच्चों को पॉकेट मनी देना उचित है भी और नही भी। अगर आपका बच्चा 7-8 साल से ऊपर का है तो उसे थोड़ा पॉकेट मनी देना चहिये जिससे कि उसे पैसे का मैनेजमेंट समझ मे आये।और बच्चे के उम्र के हिसाब से ही पॉकेट मनी भी दें।लेकिन पैसे के मैनेजमेंट सीखने के लिए आपको उससे कोई छोटा-छो...