क्षमा और भरोसा प्राप्त करना एक महान गुण है।
आज के मॉर्निंग असेंबली में बच्चों को प्रधानाचार्य के द्वारा दो कहानियां सुनाई गई जिसके अंतर्गत उनके बार-बार शिकायत करने की आदत में सुधार होगा।सभी बच्चे अपने मित्रो के साथ ही खेलते हैं लेकिन थोड़ी-थोड़ी बातों को लेकर एक दूसरे की शिकायत भी करते हैं।बार- बार झूठी शिकायतों से शिक्षक के नजर में उनका भरोसा कम हो जाता है।और जब सच में कोई घटना होती है तो तब शिक्षक बच्चो पर भरोसा नहीं कर पाते हैं।
एक गांव में एक चरवाहा रहता था।वह रोज गांव के सभी पशुओं को खेत में चराने लेकर जाता था।एक दिन उसके दिमाग में मस्ती सूझी कि क्यों ना गांव के अन्य किसानों के साथ थोड़ी मस्ती की जाय।गांव वालों के साथ मजाक करने के लिए वह खेत में तेज-तेज चिल्लाने लगा की बचाओ-बचाओ भेड़िया आ गया ,भेड़िया हमारे जानवरों को खा जाएगा।इतना सुनकर गांव वालों जहां थे वहीं से जल्दी भागकर आए।आने के बाद देखे की वह चरवाहा खूब तेज हंस रहा है और वहा कोई भेड़िया नहीं है।गांव वाले उस चरवाहे को खूब खरी-खोटी सुनाएं और वापस आ गए।
दिन बीतने लगा।फिर उस चरवाहे के दिमाग मस्ती करने की सूझी कि एकबार फिर क्यों ना वैसा ही मजाक किया जाए।फिर उसने चिल्लाना शुरू किया कि बचाओ बचाओ ,भेड़िया आया।गांव वाले फिर उसके झांसे में आ गए और दौड़कर उसके तरफ भागे लेकिन फिर वैसा ही था।चरवाहा हंस रहा था और वहा कोई भेड़िया नहीं था।इस प्रकार से गांव के सभी लोग नाराज हो गए और भला बुरा सुनाकर चले गए।
कुछ दिन के बाद रोज की तरह जब वह अपने पशुओं को चराने ले जा रहा था तभी सच में भेड़िया गया।भेड़िया को देखकर वो चरवाहा बहुत डर गया और तेज-तेज चिल्लाकर गांव वाले बुलाने लगा।लेकिन गांव वालों को लगा कि इस बार वह मजाक कर रहा है तो इस बार सब गांव वाले सुनकर भी उसके पास नहीं गए।
इधर भेड़िया आकर बहुत सारे जानवरों को मार चुका था।और चरवाहा रो रहा था।जब ये बात गांव वालों पता चली तो वे उस चरवाहे पर बहुत नाराज हुए और फिर कभी उसको पशुओं को चराने के लिए नहीं दिए।
बार-बार झूठ बोलने से वह चरवाहा अपना पूरा भरोसा उस गांव वालों के प्रति खो दिया था।और इस प्रकार से गांव वालों को बहुत नुकसान हुआ।
इस तरह से बच्चो, अगर आप भी अगर हर छोटी छोटी बातों को अपने शिक्षक से शिकायत करेंगे तो शिक्षक आप पर भरोसा करना छोड़ देंगे और अगर सच में ऐसी कोई घटना होती है तो सब आपको ही दोष देंगे।
आपसे में रहने से छोटी-मोटी घटनाएं होती रहती हैं जिसे आपलोग को माफ करके सबसे मिल जुलकर रहना चाहिए।
क्या आपको पता है प्रसिद्ध वैज्ञानिक सर आइजैक न्यटन प्रकाश के सिद्धांतों की खोज में बीस वर्षों से लगे थे। अनेक शोधपत्र तैयार किए गए थे। वे मेज पर पड़े थे, वहीं लैम्प जल रहा था, उनका कुत्ता डायमड उछला और मेज पर चढ़ गया। लैम्प पलट गया। मेज पर आग लग गई। देखते-देखते बीस वर्षों की कठिन तपस्या से तैयार शोधपत्र जलकर खाक हो गए। न्यूटन जब टहलकर आए, तो इस दृश्य को देखकर उन्हें अपार कष्ट हुआ। एक क्षण तो इतने उद्विग्न हुए कि डायमंड को मार कर खत्म करने की बात भी सोचने लगे, लेकिन न्यूटन ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने डायमंड को पास बुलाया, उसकी पीठ पर हाथ रखा, सिर थपथपाते हुए कहा, 'ओ डायमंड! डायमंड! जो नुकसान तूने पहुँचाया है, तू नहीं जानता।'
उन्होंने धैयपूर्वक सारे शोधपत्र की सामग्री को अपनी स्मृति में खोजा और फिर उसी उत्साह से नया शोधपत्र तैयार करने में जुट गए।
इस तरह हमें सब से मिलजुल कर रहना चाहिए और छोटी मोटी बातों के लिए अपने साथियों को माफ करके अपने जीवन में आगे बढ़ जाना चाहिए।
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