सफलता का महत्व
बच्चो आज हम सभी 22 अगस्त 2025 को विद्यालय के असेंबली में उपस्थित हुए हैं।आज एक कहानी के माध्यम से "सफलता के महत्व" को समझेंगे कि आपके जीवन में आपका सफल होना कितना महत्व रखता है।
प्यारे बच्चों,एक नगर में एक धोबी रहता था।उस धोबी के पास एक गधा था जो धोबी के कपड़े को ढोता था।एकबार ,रामनवमी का पूजा चल रहा था।तो मंदिर के पुजारी जी ने उस धोबी से उसका गधा लिया और गधे के पीठ पर बढ़िया सा आसन बना कर उसपे श्री राम की मूर्ति को रख नगर में घुमाने लगे।नगर के हर एक दरवाजे पर गधे को लेकर जाते।
लोग गधे के पीठ पर रखे मूर्ति को देखकर पूजा करते,अगरबती दिखाते,प्रसाद चढ़ाते और हाथ जोड़कर प्रणाम करते।
शाम के समय जब गधा अपने घर गया तो एकांत में उसने सोचा कि वह जहां जा रहा है उसकी पूजा हो रही है।लोग उसके आगे हाथ जोड़ रहे हैं वह कितना महान हो गया।मन ही मन गधे को स्वयं पर गर्व होने लगा,वह सर्वशक्तिमान है।लोग उसकी पूजा करते हैं।
तभी उसे उसकी पीठ पर रखे मूर्ति के भार का एहसास हुआ कि अब तो मेरा इतना पूजा हो रहा है अब इस मूर्ति को अपने पीठ से उतार लेना चाहिए।झूठ का ही इस मूर्ति से मेरे पीठ में दर्द बढ़ रहा है।झट से उसने मूर्ति को उतारकर हल्का महसूस करने लगा फिर वह सोचा क्यों ना एकबार नगर का भ्रमण कर लिया जाए।
कुछ ही समय बाद जब वह नगर में लोगो के दरवाजे पर गया लोग उसे हट-हट करके भगाने लगे।बाजार में गया वहां से भी लोग भगाने लगे। अब गधे को बड़ा आश्चर्य हुआ कि उसके पीठ पर जब मूर्ति रखी हुई थी तो उसकी सब कोई पूजा कर रहे थे लेकिन जब वह मूर्ति को ज्यों ही नीचे उतारा तो अब लोग उसकी कद्र नहीं कर रहे हैं।
असल में गधे के पीठ पर रखा मूर्ति एक सफलता था और वह स्वयं एक गधा।सफलता को जब अपनी पीठ से उतारा तो उसकी कोई मूल्य नहीं रही।
बच्चो इसी प्रकार से हमारे जीवन में सफलता का भी महत्व है,केवल इंसान का कोई मूल्य नहीं होता जबतक वह सफल ना हो जाए।
इसीलिए हमें अपने जीवन में सफलता को भूख की तरह पाने की कोशिश करनी चाहिए। वही लोग जो इस समय आपकी कदर नहीं करते हैं वही लोग आपके सफल होने पर आपकी बहुत ज्यादा कद्र और इज्जत करने लगेंगे।
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