बच्चों की पॉकेट मनी
बच्चों के लिए पॉकेट मनी बड़ा ही पसन्द होता है उन्हें स्कूल जाने का भले ही मन ना करें लेकिन पॉकेट मनी लेना उन्हें बहुत ही पसंद होता है,जिसे वे अपने पसंद की चीजें खरीदते हैं।
बच्चों को पॉकेट मनी देना एक तरह से खराब भी है तो एक तरह से अच्छा भी होता है।अक्सर सभी माता-पिता के मन मे ये सवाल जरूर ही आता है कि बच्चों को पैसा देना ठीक है या नहीं?या किस उम्र से बच्चों को पॉकेट मनी देना शुरू किया जाए?या कितनी पॉकेट मनी दिया जाए?
आजकल स्कूल जाते समय माता-पिता दुलार से बच्चों को पैसा थमा देते हैं या कभी-कभी किसी मजबूरी बस उन्हें टिफिन के जगह पॉकेट मनी देते हैं या कभी-कभी बच्चे के जिद्द के चलते या स्कूल भेजने के लिए पॉकेट मनी का लालच गार्डियन देते हैं।
(1) पॉकेट मनी देना उचित है या नही?
अगर उम्र के लिहाजे से देखा जाए तो बच्चों को पॉकेट मनी देना उचित है भी और नही भी।
अगर आपका बच्चा 7-8 साल से ऊपर का है तो उसे थोड़ा पॉकेट मनी देना चहिये जिससे कि उसे पैसे का मैनेजमेंट समझ मे आये।और बच्चे के उम्र के हिसाब से ही पॉकेट मनी भी दें।लेकिन पैसे के मैनेजमेंट सीखने के लिए आपको उससे कोई छोटा-छोटा सामान भी खरीदवाना चाहिए।इस उम्र में बच्चों को थोड़ा बहुत पैसे की समझ होने लगती है।7-8 साल के लगभग के बच्चों को पैसे की समझ होनी चाहिए।लेकिन ध्यान रहे की छोटे बच्चों को पॉकेट मनी ज्यादा ना दे जिससे वो फिजूल खर्ची करना सीख जाए और उसे पैसे का मूल्य ना समझ मे आये।
(2) स्कूल में पॉकेट मनी दे या नही?
एक स्कूल के प्रबंधक होने के नाते मैं कभी भी बच्चों को स्कूल में खर्च करने के लिए पॉकेट मनी देने के हक में नही हूं।कुछ ऐसे बच्चे हैं जो 100 रुपये तक पॉकेट मनी लाते हैं।और कुछ बच्चों के पेरेंट्स स्कूल में ही आकर 50रुपये या 100-100रुपये तक देकर जाते है जो कि बिल्कुल ही गलत है।
इससे अन्य बच्चों के मन मे भी लालच की भावना जगती है,फिर दूसरे बच्चे भी अपने घर मे रोज पॉकेट मनी का डिमांड करने लगते हैं।
स्कूल में एक और समस्या उत्पन्न होती है कि बच्चे बार-बार स्कूल कैंपस से बाहर जाते है जो कि स्कूल प्रबंधन के लिए सुरक्षा से सम्बंधित चिंता का विषय हो जाता है।
(3) पढाई में होती है बाधा-
अक्सर जब बच्चों को लगातार और ज्यादा पॉकेट मनी मिलने लगता है तो उनका पढाई से मन भटकने लगता है और वो हर समय नई-नई चीजों को खरीदने की सोचने लगते हैं।पैसा होने पर वो बिना सोचे-समझे फालतू की चीजें खरीदने लगते हैं जिससे उनकी आदत खराब होने लगती है।
(4) स्वास्थ्य पर असर-
बच्चों को जब ज्यादा पॉकेट मनी मिलने लगता है तो वो दुकान से अनहाईजेनिक चीजो को खरीदने लगते हैं जिससे उन्हें भूख कम लगती है और उसके वजह से विभिन्न तरह की छोटी-छोटी बीमारियां होने लगती है और बाद में जाके बड़ी समस्या उत्पन्न हो जाती है।
(5) पैसे का महत्व नही समझते-
असीमित पॉकेट मनी देने से बच्चे पैसे का महत्व नही समझते और पैसे का फ़िजूल खर्ची करने लगते है जिससे बड़े होने पर पैसे के प्रति पर उनकी आदतें खराब होने लगती है फिर वो ज्यादा पैसे का डिमांड करने लगते हैं।
अतः स्कूल में तो बिल्कुल भी पॉकेट मनी नही दे।पॉकेट मनी देने के जगह टिफ़िन में उन्हें उनका पसन्दीदा खाना दे।आप चाहे तो संतुलित डाइट का ध्यान रखते हुए उन्हें अलग-अलग तरह के खाना बना के टिफिन में दे जिससे बच्चों का मन कभी बाहर के चीजो का खाने का ना करे।
अगर घर पर पॉकेट मनी दे रहे है तो हमेशा सीमित मात्रा में दे और उसपर नजर भी रखे कि बच्चा क्या खरीद के खा रहा है या किस चीज को खरीदने में खर्च कर रहा है।
अपने मन मे ही एक नियम बना ले कि एक दिन गैप करके ही उन्हें पैसा दें या अगर रोज देते हैं तो कितना देना है ये जरूर तय कर लें।
Kundan G Chaubey
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