सुडो समाज

एक शादी-शुदा स्त्री है कम उम्र में अपने 8 साल बड़े उम्र के आदमी से उनकी शादी हुई है।लड़की गरीब परिवार से है और लड़का भी सामान्यतः परिवार से ही है लेकिन लड़की वालो को तब लगा था की लड़का बहुत अच्छे परिवार से है पिताजी सरकारी मास्टर थे,लड़का भी अच्छा ही होगा।शादी बड़े धूम धाम से कराई गयी।शादी होने के बाद लड़की को पता चला की उसका पति दारू पीता है।नशे में धुत्त रहता है।पत्नी को मारता-पिटता है।शादी के लगभग 8 साल बाद दो बच्चे हैं।अब यहां से बात शुरू होती है आभासित समाज के बारे में।आज बच्चो ने थोड़ी सी गलती कर दी जिनपे उनके दारू पिये बाप गरजने लगे,बेटो पे थप्पड़ जड़ने लगे।जीवन की गहराइयों को उन्हें समझाने लगे।बेटे बेचारे दुबक के एक कोने में बैठे हैं,पत्नी शांत लाज के भाव से मेरे सामने बैठी हैं,खुश रहने की कोशिश कर रही हैं,ये दिखाने की कोशिश कर रही हैं की ये सामान्य बात है।मैं अपने बेटो को बहुत बड़ा बनाऊंगा,एक को डॉक्टर बनाऊंगा और एक को इंजीनियर।मैं चाहे जैसा भी हूँ पर उन्हें अपने जैसा नही बनने दूंगा।एक नशे में धुत्त बाप ये सब अपने बेटो को सीखा रहा है पर बच्चो को एकदम अच्छे से पता है की कल ये सब बात शायद हो ना हो आज बर्दाश्त करना ही पड़ेगा।वो ये सारी सिख भरी बारें कब कब होती हैं उन्हें पता है।दोनों बेटे को माँ ने समझा रखा है की अगर पापा ऐसी बातें जब भी करें तो तुम दोनों चुप-चाप रहना कुछ बोलना मत वरना देखे थे न पापा कितना गुस्सा होते है ओर मारते हैं।
अब मुख्य बात पर आते हैं ये एक सिर्फ किस्सा भर है लेकिन आप हर रोज ऐसे किस्से जरूर सुनते होंगे।पिता बुराइयों के गिरफ्त में है उसे वहां से निकलना बिल्कुल ही पसन्द नही,लेकिन अपने बेटो को खुद से अच्छा बनाना चाहता है।बेटे अच्छा बनेंगे या नही उसका फैसला तो तभी हो जाता है जब ऐसा पिता अपने खुद की तुलना अपने बेटे से करता है।पिता एक आदर्श है एक सिख है एक संस्कार है वो सिर्फ एक आभास या कल्पना नही है जो सिर्फ पिता शब्द में है।पिता एक सुडो(Pseudo) नही है और यह समाज एक सिद्धांत पर चलता है जो बुरा है वो हमेशा ही बुरा रहेगा उसे कितना भी तर्क द्वारा सही सिद्ध नही किया जा सकता है पर आज समाज इस किस्से के पिता पर चल रहा है जिन्हें सुडो समाज कह सकते हैं।

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