"बिहार में हम"

आजकल बिहार में,अरे आजकल क्या 30 सालो से ही ऐसा माहौल है की लोग यहां आने को डरते हैं हाल ही में एक मेरे मित्र सर्वेश मिश्र(लखनऊ) ने प्रिज्म सीमेंट जैसे कंपनी में नॉकरी करने से मना कर दिया।जबकि उसे अच्छे पैकेज पर कंपनी हायर करी थी।मेरे मित्र ने इस डर से नॉकरी छोड़ी की यहाँ बिहार में खतरा बहुत है,खून-खराबा बहुत होता है।ऐसा माहौल है हमारे बिहार का।
और सच में यही माहौल है बिहार में।बीच के कुछ सालो में जब नीतीश कुमार की सरकार बनी थी तो लोगो में आश जगी की चलो अब कुछ माहौल ठीक होगा,कुछ साल तो माहौल सुधरने की स्थिति की तरफ बढा लेकिन फिर अब हाल वही जंगलराज के तरफ अग्रसर है।
लोगो में नकारात्मक विचार भरे पड़े हैं।यहां किसी शिक्षित और अच्छे लोगो की उतना इज्जत नही होती जितना किसी बाहुबली या गुंडे की होती है।अगर किसी ने दो-चार मर्डर कर दिए तो समाज में उसकी तूती बोलने लगती है अब उसके पास ढेर सारे सर्टिफिकेट बन गए है जैसे की अब वो राजनीति में आ सकता है,समाज सेवा कर सकता है या ठेकेदारी कर सकता है।हमारे यहां बाहुबलियों की बड़ी इज्जत है वैसे तो बहुबलियों की इज्जत भारत भर में होती है लेकिन हमारे बिहार में कुछ ज्यादा ही होता है।लोगो अगर एक फोटो किसी बहुबली के साथ खिंचा लेते है तो उसे भी कोई छोटी-मोटी चुनाव जैसे प्रधानी,बी.डी.सी.वगैरह का चुनाव लड़ लेते है।और अगर फोटो रोज खिंचाने लगे तो समझिये कुछ बड़ा होने वाला है बन्दा MLA,MP या जिला परिषद तक जाएगा या कुछ बड़ा करेगा।
मेरे मित्र के साथ एकबार मैं जहानाबाद जिला गया था।बात ही बात में पता चला की जिस रोड से हमलोग गुजर रहे थे वो एक हाईवे था एकदम टूटा फूटा सँकरा सा,मैंने पूछा की ये रोड ऐसा कयूं है?
मित्र ने बताया की भाई ये रोड जिस गांव से होकर गुजरती है वहां हर एक बाहुबलियों को ठेकेदार द्वारा रंगदारी खिलाना पड़ता है तो जैसे-तैसे ही रोड बन पाया है।उसी ने एक ब्रिज भी दिखाया जो रंगदारी मांगे जाने के कारण ठेकेदार आधा काम करने के बाद भाग खड़ा हुआ है और ब्रिज अभी तक अधूरा ही पड़ा है।
इसी तरह अभी मेरे गांव से लगभग पांच किलोमीटर दूरी पर बिहार से यूपी के बॉर्डर तक का रोड पास हुआ,काम जल्दी शुरु हुआ बड़ी तेजी के साथ तभी ठेकेदार किसी बाहुबली के द्वारा रंगदारी मांगे जाने के कारण सड़क निर्माण बीच में ही छोड़ के भाग खड़ा हुआ है।ये है बिहार की स्थिति।
ये ऊपर जो मामले हैं सब छोटे-मोटे है।यह तक की किसी को गोली मार देना,हाथ-पैर तोड़ देना,सब आम बात है।इसमें छोटे बच्चें भी लिप्त है जिनकी अभी पढ़ने की उम्र होती है वो भी 10वीं या 12वीं में।
यहाँ के लगभग 90% लोगो के आदर्श कोई प्रोफेसर,वैज्ञानिक,शिक्षक या कोई अधिकारी नही होते।प्रोफेसर साहब,वैज्ञनिक या शिक्षक के प्रति इज्जत तो होती है लेकिन अधिकारी को भी बस ललचाई आंखों से देखते हैं की काश हम भी ऐसे बनते तो गर्दा मचा देते और पैसा तो जम के झाड़ते।
क्यूंकि बिना अधिकारी और प्रशासन के कोई दांव पेंच कहा लगता है।
बिहार में लोगो के आदर्श वो बाहुबली हैं जो सबसे ज्यादा मर्डर किये है,ज्यादा से ज्यादा धन हड़पे है,बड़े बड़े आदमियो को गोली मार चुके है,फलां-फलां।गरीबो के मसीहा,जनसेवक,आपका अपना जैसे-जैसे नमो से उन्हें जाना जाता है।
अब ऐसा भी नही की हमारे बिहार में कुशल लोगो की कमी है या यहाँ सबलोग एक जैसे ही हैं।बिल्कुल नही,सबसे ज्यादा UPSC परीक्षा पास करने वाले हमारे यहा ही है।इस तरह के माहौल में भी यह के बच्चे बड़े ही कुशल होते है।लेकिन ये सितारे छुप जाते हैं उन गरीबो के मसीहो और जनसेवकों के चकाचौन्ध के बीच में।
गरीबी और बेरोजगारी एक बीमारी के जैसे अपना पैर फैला चुकी हैं।अब इनसे उबरना इतना आसान नही होगा।यहाँ के इस स्थिति के जिम्मेदार यहां के लोगो को मानता हूँ यहां के लोगो की आत्मा मर चुकी है।जी हुजूरी ,चमचई और जातिवादी यहां के लोगो के आत्मा और खून में समा चुकी हैं।
किसी बाहुबली को जब कोई अपना आदर्श मानते है उन्हें ही सबकुछ मानते हैं,जहाँ के लोग अपनी व्यक्तिगत लालच में आकर वोटिंग करते हैं,अपने जाती वाले नेता को चुनते है तो हाल भी यही होना चाहिए इनके साथ।

शीशे की हवेली बनाने का सारा सामान रखा है हमने।
तिनका भर ही सही पर बिहार को बदलने का अरमान रखा है हमने।।


                            -Kundan G Chaubey



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